अयोध्या।ग्राम पंचायत जैसुखपुर ने बारिश को दिल से अपनाया है। नतीजा – पूरा गांव अब मिनी झील बन चुका है! स्कूल जाना है? तो नाव या बोटिंग का इंतज़ाम करें जनाब, क्योंकि सड़कें तो जल समाधि ले चुकी हैं।
प्राथमिक विद्यालय बच्चों को ज्ञान से पहले तैराकी सिखा रहा है। शिक्षक रोज़ खुद को जलपरी समझकर स्कूल पहुंच रहे हैं। स्कूल के चारों तरफ ऐसा जल भराव है कि लगता है सरकारी तंत्र ने "स्विमिंग क्लासेस" की नई योजना बिना बताए शुरू कर दी है।
ग्रामीण तौहीद खान की मानें तो प्रधान तो महिला हैं, लेकिन रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ में है। मतलब “नाम की प्रधानी, काम की बगानी”।
नालियां अब नाले नहीं, स्थायी गटर बन चुकी हैं। सफाईकर्मी कब आए थे, ये अब गांव की प्राचीन कहानियों में गिना जा रहा है। कीचड़ ऐसा कि जूते भी वापस लौटने से मना कर दें।
गांव में खुली बैठक? अरे साहब, यहाँ तो बारिश में खुले में निकलना ही जोखिम है, मीटिंग क्या खाक होगी।
गांव के विकास कार्यों पर ग्रामीणों का कहना है – “काम नहीं हुआ लेकिन फोटो बहुत खिंचवाए गए हैं”।
हालांकि खंड शिक्षा अधिकारी और खंड विकास अधिकारी ने कहा है कि “मामला संज्ञान में है” – अब ये “संज्ञान” किस फ़ाइल में जाकर सोता है, ये देखने वाली बात है।