अयोध्या।रूदौली की हवा इन दिनों बदल सी गई है। गलियों और चौपालों में एक ही नाम गूंज रहा है एसडीएम विकास धर दूबे। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने यह साफ संदेश दे दिया था कि किसी भी सरकारी काम के बदले रिश्वत नहीं चलेगी। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था, कोई भी कर्मचारी पैसे मांगे तो सीधे बताइए, कार्रवाई होगी। इसी सख़्ती का नतीजा है कि वसूली पर रोक लगी, और गलत तरीके से काम करने वालों की नींद हराम हो गई।
इसी बीच, अयोध्या के जिलाधिकारी द्वारा शासन स्तर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस रूदौली विधायक रामचंद्र यादव की शिकायत के आधार पर जारी हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बाढ़ राहत सामग्री वितरण में देरी हुई, कल्याणी नदी में युवक के डूबने की घटना पर वे देर से पहुंचे और तहसील दिवस के दौरान विधायक की कुर्सी व नेम प्लेट हटवाने जैसी बातें सामने आईं।
लेकिन क्षेत्र में इन आरोपों को लेकर अलग ही चर्चा है। स्थानीय लोग और तहसील कर्मचारी बताते हैं कि दूबे ने बाढ़ जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी राहत व बचाव कार्यों को सक्रियता से संचालित किया। उनका मानना है कि कभी-कभी मौके पर देरी हालात की मजबूरी होती है, लेकिन नीयत पर सवाल नहीं। तहसील दिवस में अधिकांश मामलों का तुरंत निस्तारण होना और भ्रष्टाचार पर रोक जैसी पहल उनकी प्रशासनिक छवि को मजबूत बनाती है।
कल से सोशल मीडिया और क्षेत्र की जनता भी एसडीएम दूबे के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। फेसबुक, व्हाट्सऐप और स्थानीय मंचों पर लोग उनके पक्ष में पोस्ट कर रहे हैं और यह कह रहे हैं कि एक ईमानदार, सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी को राजनीतिक कारणों से घेरा जा रहा है। जनता पहले सोच के कारण उनका दफ़्तर आम नागरिकों के लिए हमेशा खुला रहता है और वे बिना भेदभाव समस्याओं का समाधान करते हैं।
यही वजह है कि नोटिस के बाद भी स्थानीय लोगों में उनके प्रति भरोसा और समर्थन बरकरार है। अब सबकी नज़र इस पर है कि दूबे अपना पक्ष रखकर इन आरोपों को कैसे खारिज करते हैं।