गर्भवती महिलाओं को हुई परेशानी, पोषण आहार वितरण में भी अव्यवस्था
अयोध्या। मवई सीएचसी में महिला चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एनसीडी डॉक्टर डॉ. सबीना खान और आरबीएसके की रंजना गुप्ता ने महिलाओं की ओपीडी संभाली, लेकिन विशेषज्ञ की कमी महसूस की गई। इसके साथ ही, पोषण आहार वितरण में भी अव्यवस्थाएं सामने आईं। सीएचसी में महिला चिकित्सक की स्थायी तैनाती न होने से गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच और परामर्श प्रभावित हो रहा है। ओपीडी में मौजूद डॉक्टरों ने सामान्य जांचें कीं, लेकिन विशेषज्ञ महिला चिकित्सक की गैर-मौजूदगी से मरीजों को दिक्कतें हुईं।
सरकार द्वारा दिए जाने वाले पोषण आहार (दूध और हलवा) के वितरण में भी गंभीर अनियमितताएं देखी गईं। एचआरपी दिवस पर आई कुल 87 गर्भवती महिलाओं में से केवल 35 को ही अमूल का दूध और हलवा मिल पाया। शेष 52 महिलाएं पोषण सामग्री प्राप्त किए बिना ही वापस लौट गईं।
स्थानीय महिलाओं और आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि एचआरपी दिवस पर अक्सर ऐसी ही स्थिति रहती है। इस कारण गर्भवती महिलाओं में व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष है। सीएचसी की जर्जर स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। इमरजेंसी कक्ष का दरवाजा कई महीनों से टूटा हुआ है और इसकी मरम्मत नहीं की गई है। इससे मरीजों और कर्मचारियों को आवागमन में परेशानी होती है, लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
अयोध्या जिलाधिकारी के बुधवार को संभावित निरीक्षण की सूचना मिलने के बाद सीएचसी परिसर में अचानक हलचल बढ़ गई। कर्मचारी आनन-फानन में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं सुधारने में जुट गए। मरीजों ने आरोप लगाया कि साफ-सफाई पर केवल निरीक्षण के दिनों में ही ध्यान दिया जाता है, जबकि सामान्य दिनों में स्थिति खराब रहती है। सीएचसी अधीक्षक संतोष कुमार ने दूध वितरण में कमी पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि एचआरपी दिवस पर सभी महिलाओं को दूध उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन महिलाओं को दूध नहीं मिल पाया है, उन्हें अगले एचआरपी दिवस पर आशा बहू के माध्यम से उनके घर भेज दिया जाएगा।